डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढाकर हमारे प्रधानमंत्री जी कौन सा आर्थिक सुधार करना चाहते हैं सामान्य जन की समझ के बाहर है। यह कोई पहली बार नहीं है। हर दो चार महीने पर महंगाई में इजाफा कर कॉंग्रेस के नुमाइंदे इस कदर खुश हो जाते हैं जैसे बहुत बड़ा तीर मार लिया हो। बाज़ार को आमजन की पहुंच के बाहर कर वे देशवासियों को जीते जी मार ही डालेंगे तो सुधार का स्वाद कौन उठाएगा। उनके विदेशी आका?
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